पुल-पुलिया पर भारी पड़ रही पहली बरसात, कांग्रेस ने लगाया कमीशनखोरी का आरोप

bhupesh_index_tsरायपुर ।      प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने रमन सरकार की जमकर लताड़़ लगाते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी से हर कोई त्रस्त है, हर कार्य में सिर्फ भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी है सड़कों, पुल-पुलिया और बैराज निर्माण में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। हालात यह हैं कि ये एक बरसात भी नहीं झेल पा रहे हैं। पुल-पुलिया बह जा रहे हैं और सड़कें धंस जा रही है। पिछले एक पखवाड़े में ऐसे लगभग दर्जन भर मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी भी अधिकारी या मंत्री पर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है।

श्री बघेल और श्री सिंहदेव ने कहा कि धरमजयगढ़ विकासखंड के पोटिया गाँव में 3 करोड़ 41 लाख के लागत से बना पुल पहली बरसात भी नहीं झेल पाया। गुणवत्ताविहीन निर्माण का खामियाजा अब ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है, वहीं पहली बारिश में ही मात्र चार महीने पहले लगभग 325 करोड़ रुपये की लागत से बना अरपा भैंसाझार बैराज का डाउन स्ट्रीम फ्लोर बह गया। खरगहनी ग्राम में बना एक्वाडक्ट में भी दरार पड़ गई और स्लैब से तेज बहाव से पानी रिसने लगा। अम्बागढ़ चैकी ब्लाक मुख्यालय से ग्राम पांगरी तक लगभग 14 करोड़ की लागत से हाल ही में नवनिर्मित सड़क लोकार्पण से पहले ही भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गई। सड़क जगह-जगह से धसकने एवं बैठने लगी है, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना घटित होने की आशंका बढ़ती जा रही है, इसके अलावा, कई अन्य गंभीर मामले बिलासपुर-अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुल का बह जाना, मैनपुर-कुल्हाडीघाट मार्ग पर लोक निर्माण विभाग द्वारा लगभग 20 करोड़ से भी अधिक लागत से बने सड़क का बह जाना सुर्खियों में रहा है।
पुलिया पहली बरसात नहीं झेल पाती है और पुल बह जाता है। सड़क भारी वाहनों के भार को बर्दाश्त नहीं कर पाती है और धसकने-बैठने लगती है। अधिकांश निर्माण योजना का कार्यान्वयन तय मानकों को दरकिनार कर किया जाता है। एनजीटी भी राज्य सरकार को घटिया सड़क निर्माण एवं अनियमितताओं पर आगाह कर चुकी है, इसके बावजूद मुख्यमंत्री की चुप्पी और गैरजिम्मेदाराना हरकत बेहद शर्मनाक एवं निंदनीय है, इन सभी गंभीर मामलों में अभी तक किसी भी अधिकारी एवं मंत्री की जिम्मेदारी तय नहीं की गयी है, दिखावे के लिए बस छोटे अधिकारियों-कर्मचारियों के निलंबन का खेल चलता है। कब उन्हें फिर से बहाल कर लिया जाता है, यह पता भी नहीं चलता। अधिकारियों एवं मंत्रियों को भी पता है कि अब सरकार जाने वाली है और प्रदेश में कमीशनखोरी-काल अब अपने अंतिम पड़ाव में है, इसलिए सभी मिलजुल कर जनता के पैसों को दोनों हाथों से बटोरने एवं अपनी तिजोरी भरने में व्यस्त हैं।
दोनों नेताओं ने कहा है कि जनता के जानमाल की रक्षा हेतु, प्रदेश में मची सुनियोजित, संस्थागत, सरकारी लूट को रोका जाना चाहिए। मुख्यमंत्री को इन सभी मामलों में हुए अतिगंभीर भ्रष्टाचार एवं करोड़ों की कमीशनखोरी की उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए और तत्काल प्रभाव से सम्बंधित मंत्री एवं अधिकारियों को बर्खास्त कर देना चाहिए।

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