पवार ने कहा-व्यक्तिगत जानकारी सोच समझ कर दें

suchna ka adhikar sambandhi baithak (3)बिलासपुर—कलेक्ट्रेट स्थित मंथन सभागार में सूचना अधिकार अधिनियम पर संभागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। सूचना मांगे जाने पर देरी के कारणों पर चर्चा हुई। राज्य सूचना आयुक्त ने जनसूचना अधिकारियों को जरूरी टिप्स भी दिये। सूचना आयुक्त ने ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना अधिकार अधिनियम की अच्छी स्थिति नहीं होने पर चिंता जाहिर की है।
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                      संभागीय कार्यशाला में राज्य सूचना आयुक्त मोहनराव पवार,संभाग आयुक्त टीसी महावर उपस्थित थे। सूचना अधिकार अधिनियम की जानकारी दी। इस दौरान सरकारी कर्मचारियों के अलावा सामाजिक संस्थान के लोगों ने भी भाग लिया। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कार्यशाला में कई सवाल किए। राज्य सूचना आयुक्त ने बारी बारी से सभी के सवालों का जवाब भी दिया।

                             राज्य सूचना आयुक्त मोहन राव पवार ने कहा कि सूचना अधिकार से कार्यों में पारदर्शिता आयी है। जनसूचना अधिकारी कलर्क के भरोसे ना रहें। सूचना अधिकारी निर्धारित समय में जानकारी दें। यदि जानकारी नहीं दी जाती है, तो आवेदक को कारण  बताएं। या फिर दण्ड के लिए तैयार भी रहे। बिना वजह सूचना नहीं दिए जाने पर जनसूचना अधिकारी परेशान हो सकते हैं।

                                पवार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में सूचना अधिकार अधिनियम की स्थित ठीक नहीं है। अधिकारियों और समाजसेवियों को जिला स्तर पर कार्यशाला आयोजित कर प्रशिक्षित करने को कहा।

                संभागायुक्त टी.सी. महावर ने कहा कि सूचना अधिकार की बेसिक जानकारी नहीं होने पर अधिकारियों में भ्रम की स्थिति में होते हैं। मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंच जाता है। इसे समझना होगा। अधिनियम में सब कुछ सप्ष्ट है। आवेदन में मांगी गई जानकारी देने योग्य है या नहीं इसकी जानकारी आवेदक को दें। शुल्क पटाने के 30 दिन में जानकारी देना अनिवार्य है।

                        कार्यशाला में सवाल जवाब के दौरान संभागायुक्त ने कहा कि व्यक्तिगत सूचना की जानकारी मांगे जाने पर यदि किसी प्रकार का नुकसान हो सकता है। इस पर जनसूचना अधिकारी को गंभीरता से निर्णय लेने का काम करना होगा।

कार्यशाला में समाजसेविकयों,सरकारी कर्मचारियों, न्यायिक जगत से जुड़े लोगों ने कई सवाल किए। राज्य सूचना आयुक्त  मोहन राव पवार,संभागायुक्त महावर कलेक्टर पी.दयानन्द ने समुचित जवाब दिया। अधिकारियों ने कहा कि सुनवाई में देर होने पर अर्जेंट हियरिंग में आवेदन लगाया जाना चाहिए। सुनवाई जल्दी होने से आवेदक को नुकसान नही होगा।

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