नन्द कुमार ने क्यों कहा….बाप और बेटा…दोनों एक ही रंग-ढंग के…मिलेगी सजा

nand kumar saiबिलासपुर— हाइपावर कमेटी के पास…जोगी की जाति मामले में किसी भी प्रकार के निर्णय लेने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट गाइड लाइन तय किया है। कमेटी को सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश करने की जरूरत नहीं है। यह बातें राष्ट्रीय जनजाति आयोग के अध्यक्ष नन्दकुमार साय ने कही। केन्द्रीय मंत्री ने पत्रकारों को बताया कि मुझे तो पहले से ही मालूम था कि अजीत जोगी आदिवासी नहीं। पिता के कर्मों की सजा अब बेटे को भी मिलेगी।

                      नन्दकुमार साय ने बताया कि हाईपावर कमेटी को बहुत पहले रिपोर्ट पेश कर देना चाहिए था। बहुत सारी अड़चनों के बाद रिपोर्ट आने में देरी हुई। कोर्ट के आदेश पर जोगी की जाति निर्धारित करने हाईपावर कमेटी बनायी गयी। कमेटी की रिपोर्ट सामने आ चुकी है।  अब आगे क्या करना है… रिपोर्ट को कहां और कब दिया जाना है… सब कुछ सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के हाईपावर कमेटी को करना है।

                                                    नन्दकुमार साय ने कहा कि अजीत जोगी जनजाति नहीं है। लेकिन उसने सरकारी संसाधनों का गलत तरीके से उपभोग किया । आदिवासियों के साथ छल किया। आदिवासियों के अधिकार को गलत तरीके से हासिल किया। कानून की नजर में जोगी अपराधी हैं। हाईपावर कमेटी अपराधों का निर्धारण करेगी। उसने फर्जी तरीके से आदिवासी सीट से चुनाव लड़ा। जोगी के खिलाफ पुलिस अपराध दर्ज किया जाएगा। कलेक्टर को भी हाईपावर कमेटी से पत्र भेजा जाएगा।

             नन्दकुमार ने बताया कि हाइपावर कमेटी ने अभी तक जोगी की जाति प्रमाण पत्र को निरस्त किया है। अब आदिवासियों के अधिकारों को छीनने, सुविधाओं का उपभोग करने और वसूली को लेकर एफआईआर दर्ज किया जाएगा।

                          साय ने कहा अजीत जोगी के बेटे को भी सजा मिलेगी। बाप का रंग ढंग जिस तरह का है उससे बेटे का रंग ढंग अलग नहीं है। सजा दोनों को मिलेगी।

                  साय ने एक सवाल के जवाब में बताया कि मैने या संत नेताम ने दुखी होकर नहीं..जोगी की करतूतो को कारण विरोध किया। हमने जोगी के खिलाफ केवल इसलिए लड़ाई की क्योंकि उन्होने गलत तरीके से किसी वर्ग विशेष की हक को छीना है। जोगी आदिवासी नहीं है…उसने भोले भाले आदिवासियों को ठगा है।

                     साय ने बताया कि मुझे नहीं मालूम कि जोगी का सरकारी कामकाज कैसा था। यदि उन्होने ने कोडार बांध में घपला किया हो तो इसकी जानकारी मुझे नहीं है। लेकिन इतना पक्का है कि अजीत जोगी आदिवासी नहीं है।

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