तहसीलदार के चैम्बर में दलालों का ठीहा…नहीं समझ में आयी हाईकोर्ट की नसीहत

IMG-20170818-WA0014 बिलासपुर—तहसील कार्यालय में हाईकोर्ट की नसीहत का कोई फर्क पड़ता दिखाई नहीं दे रहा है। तहसीलदार अपने चैम्बर में रहे या ना रहे…दलाल कुर्सी लगाकर दिन भर जमे रहते हैं। जरूरी दस्तावेज टेबल पर इधर उधर विखरे रहते हैं। कम्प्यूटर आपरेटर दलालों को आनलाइन दस्तावेज दर्शन कराता है। कुछ महीने पहले तहसील कार्यालय समेत अन्य कार्यालयोंं में गैर कर्मचारियों के प्रवेश पर हाईकोर्ट ने प्रतिबंध लगा दिया था। बावजूद इसके तहसीलदार कार्यालय बिलासपुर के अधिकारी और दलाल अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे है। तहसीलदार की उपस्थिति और अनुपस्थिति में चैम्बर में दलालों का मजमा लगा रहता है।

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                     मालूम हो कि हाईकोर्ट ने कुछ महीने पहले एक मामले को संज्ञान में लेते हुए आदेश दिया था कि सरकारी कार्यालयों में खासतौर पर चैम्बर और गोपनीय दस्तावेज वाले स्थानों  में गैर कार्यालयीन लोगों को प्रवेश वर्जित है। जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दलालों को चैम्बर में प्रवेश बंद कर दिया था। एक बार फिर दलालों का खेल और प्रतिबंधित जगहों पर आना जाना शुरू हो गया है।  तहसीलदार अपने चैम्बर में रहे या ना रहे। दलाल पैर पर पैर रखकर एसी का आनंद लेते हैं।

                   सीजी वाल ने बिलासपुर तहसीलदार चैम्बर में बैंक दलाल समेत कई जमीन दलालों को आज आराम फरमाते पाया। जबकि तहसीलदार अपने चैम्बर में घंटो से नहीं थे। दलाल ने बताया कि तहसीलदार उइके करीब एक घंटे बाद आएंगे। इस दौरान दलाल को कम्प्यूटर आरपरेटर दस्तावेज भी दिखा रहा था। पत्रकारों को देखते ही तहसीलदार के चैम्बर में बैठे कुछ दलाल नौ दो ग्यारह हो गए। तो कुछ स्मार्ट दलाल टस से मस नहीं हुए। लेकिन फोटोIMG20170818154850 लिए जाने का विरोध जरूर किया।

घंटो गायब रहते हैं तहसीलदार

तहसीलदार उइके अपने चैम्बर से घंटो गायब रहते हैं। तहसीलदार का रीडर हर बार कहता है कि साहब मीटिंग और हाईकोर्ट में हैं। कई ग्रामीणों ने बताया कि पिछले छः महीने से पेशी पर पेशी हो रही है। लेकिन तहसीलदार का दर्शन नहीं हुआ।  तहसील कार्यालय के ही एक कर्मचारी ने बताया कि साहब शाम चार बजे के बाद बैठते हैं।

                                        कर्मचारी ने यह नहीं बताया कि तहसीलदार की अनुपस्थिति में अन्दर बैठने वाले कौन कौन है। सूत्रों की माने तो कैमरे में कैद व्यक्ति बैंक का मिडिल मैन है। जिसका तहसील कार्यालय के प्रतिबंधित जगहों में धड़ल्ले से आना जाना होता है। आज भी तहसीलदार की अनुपस्थिति में घंटो पैर पर पैर रखकर बैठा रहा। जबकि तहसीलदार के टेबल पर जरूरी दस्तावेज रखे थे।

हाईकोर्ट की नसीहत

                                 पुराने एक मामले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी गैर कार्यालय कर्मचारी को गोपनीय जगहों में प्रवेश वर्जित है। तहसीलदार की अनुपस्थिति में चैम्बर में कोई प्रवेश नहीं कर सकता है। खास तौर पर जब जरूरी दस्तावेज रखे हो। या कार्यालयीन काम चलता हो। मालूम हो कि तहसीलदार चैम्बर में ही कम्यूटर आपरेटर भी काम करता है। तहसीलदार की अनुपस्थिति में दलाल यहां क्या कुछ करते होंगे इसका अनुमान ही लगाया जा सकता है।

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