कैबिनेट फैसले से समाज के वंचित वर्ग को मिलेगी,सम्मान से जीने की सुविधा

meet_24_july_indexरायपुर। छत्तीसगढ की रमन सरकार की कैबिनेट बैठक में सेामवार को कई अहम फैसले लिये गये। जिसमे बडा फैसला समाज कल्याण से जुडा हुआ है। छत्तीसगढ निराश्रितों एवं निर्धन व्यक्तियों की सहायता अधिनियम में संशोधन के लिए कैबिनेट की मुहर लगने के बाद अब समाज के ऐसे लोगों को भी सरकार की मदद मिल सकेगी, जो अब तक इस फेहरिस्त में शामिल नहीं होने की वजह से वंचित रहे है।

                                       sonmoni_borah_mantralay_fileसमाज कल्याण विभाग के सचिव सोनमणि बोरा ने इस सिलसिले मे विस्तार से बताया कि इस अधिनियम में निराश्रित की परिभाषा का दायरा अब तक अपेक्षाकृत सीमित रहा है।अब इसमें संशोधन से अधिनियम की मूल भावना को व्यापकता मिलेगी।विशेष रूप से एच.आई.व्ही एड्स पीडित,कुष्ठ रोग से पीडित व कुष्ठ रोग से स्वस्थ हुए व्यक्ति,मानसिक रोग से पीडित एवं तृतीय लिंग के व्यक्ति इसका लाभ ले सकेंगे।छत्तीसगढ में करीब 27 हजार से अधिक एच.आई.व्ही पीडित – प्रभावित लोग है।जिसमें करीब डेढ हजार बच्चे भी शामिल है।इन बच्चों के लिए खास तौर से पोषण आहार का इंतजाम जरूरी है।ऐसे सभी लोगों के लिए सहायता,पुनर्वास,कल्याण और आजीविका की आवश्यकता अनुसार व्यवस्था किया जाना है।इसी तरह करीब साढे बारह सौ से अधिक कुष्ठ रोग से पीडित और 38 हजार कुष्ठ रोग से स्वस्थ हुए व्यक्ति समाज में सम्मान पूर्वक जीने का हक रखते है।उनके जीवन-यापन,भरण-पोषण और इलाज का इंतजाम इस अधिनियम के संशोधन के बाद निराश्रित निधि से सहायता के रूप् में किया जा सकेगा।

                                  श्री बोरा ने बताया कि इस समय मानसिक रूप् से पीडित लोगों के इलाज के लिए एक मात्र अस्पताल है,ऐसी हालत मे सरकारी और गैर सरकारी चिकित्सा सेवा को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।मरीज के ठीक होने पर भी उनके परिजन अपने पास रखने एवं देख भाल करने में असमर्थ होते है।अब मानसिक रोगो से पीडित व्यक्तियों के उपचार के बाद स्वस्थ व्यक्तियों के अस्थायी आवास व चिकित्सा की व्यवस्था के लिए हाफ-वे-होम जैसी सुविधा मुहैया करायी जा सकेगी।उनका इलाज सराकरी व गैर सरकारी अस्पतालों मे हो सकेगा।

                                इसी तरह तृतीय लिंग व्यक्तियो को भी सम्मान जनक जीवन यापन के लिये जरूरी सुविधा व कल्याणकारी योजनाओं के साथ पुनर्वास की सुविधा आवश्यक है।अब तृतीय लिंग के व्यक्तियों के संबंध में समाज में पर्याप्त जागरूकता व पुनर्वास कार्यक्रमों का क्रियान्वयन इस निधि से किया जा सकेगा।तृतीय लिंग समूह के करीब 3 हजार लोगों को समाज की मुख्य धारा से जोडने के लिए उन्हें बौदि्धक,सांस्कृतिक,आर्थिक,क्रीडा,कला व सृजनात्मक कार्यों के लिये जरूरी सहायता मुहैया करायी जा सकेगी।श्री बोरा ने उम्मीद जतायी कि अधिनियम में संशोधन से समाज के वंचित वर्ग को बेहतर जीवन जीने के लिए जरूरी मदद मिल सकेगी।

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