अमित ने रमन से पूछा – आदिवासी नहीं हैं , तो किस जाति के हैं जोगी ….. ?

amittttiuuiरायपुर ।  मरवाही विधायक अमित जोगी ने शुक्रवार को  जाति मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से आठ अहम् सवाल पूछ कर रिपोर्ट की विश्वसनीयता और सच्चाई पर कई सवाल उठाये हैं और हाईपॉवर समिति की रिपोर्ट को राजनीति से प्रेरित, पूरी तरह झूठा और गैर-क़ानूनी बताया है।

अमित जोगी ने डॉ रमन सिंह से पूछा है कि डॉ रमन सिंह ने अजीत जोगी की जाति पर रिपोर्ट आने के ३ महीने पहले ६ सदस्यों वाली छानबीन समिति में एक ही अधिकारी को समिति के तीनों महत्वपूर्ण पद- समिति का अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव- क्यों सौंप दिया। क्या प्रदेश में अधिकारियों का अचानक अकाल पड़ गया था?

 नियमानुसार समिति के अध्यक्ष प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी रहते हैं। रमन सिंह ने ये जवाबदारी एक जूनियर  संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को “विशेष सचिव” का दर्जा देकर सौंप दी। क्या प्रदेश के दो दर्जन से अधिक प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों में से रमन को समिति का अध्यक्ष बनाने क़ाबिल कोई नहीं मिला?

  अमित ने पूछा है कि छानबीन समिति ने समिति की प्रक्रिया के नियम २१ का उल्लंघन करते हुए जाँच दल की रिपोर्ट से ठीक उलटी रिपोर्ट किस आधार पर बनाई । जाँच दल ने ये पाया कि जोगिसार के ग्रामवासियों ने ये माना कि अजीत जोगी आदिवासी है। जाँच दल ने इस सम्बंध में अजीत जोगी द्वारा प्रस्तुत जोगिसार की ग्राम सभा द्वारा विधिवत पारित ग्राम सभा प्रस्ताव की भी अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की। किस आधार पर छानबीन समिति ने जोगिसार के लोगों की बात को झुटला दिया?  जाँच दल ने इस बात को भी स्वीकार किया कि जाँच के दौरान ये पाया गया कि जोगी परिवार हर साल आदिवासी रीति रिवाज के अनुसार जोगिसार में अपने इष्ट देवता “जोगी बाबा” के मंदिर में पूजा-अर्चना करके नवा खाई का त्यौहार मनाता है। छानबीन समिति ने इस महत्वपूर्ण तथ्य को क्यों अपनी रिपोर्ट में शामिल नहीं किया?

 छानबीन समिति ने पूरे प्रकरण के सबसे महत्वपूर्ण १२५ साल पुराने दस्तावेज़ जिसमें स्पष्ट रूप से ये इंद्राज है कि अजीत जोगी के पूर्वज कँवर जाति के हैं को केवल इस आधार पर मानने से मना कर दिया कि उसकी फ़ोरेंसिक जाँच नहीं हुई है। जब सारे दस्तावेज़ अजीत जोगी ने खुद समिति के समक्ष उपस्थित होकर प्रस्तुत किए, तब समिति ने उनकी फ़ोरेंसिक जाँच के आदेश क्यों नहीं दिए?

  उन्होने पूछा है कि    छानबीन समिति इस निष्कर्ष पर पहुँची कि जोगी की जाति के पक्ष में ग्राम सभा प्रस्ताव नियमानुसार पारित नहीं किया गया था। अगर ऐसा था भी, तो नियमानुसार समिति को बक़ाया मुनादि कराके ग्राम सभा आहूत करनी थी ताकि सच्चाई पता लगायी जा सके। आख़िर समिति ने जोगिसार की ग्राम सभा बुलाकर ऐसा क्यों नहीं किया?

  अमित जोगी ने यह सवाल भी किया है कि   अगर छानबीन समिति की इस बात को मान लिया जाए कि धर्म-परिवर्तन उपरांत व्यक्ति आदिवासी नहीं रह जाता, तब उत्तर पूर्वी भारत और छत्तीसगढ़, झारखंड, ओड़िशा और मध्य प्रदेश समेत कई प्रांतों के करोड़ों-लाखों आदिवासी एकाएक ग़ैर-आदिवासी बन जाएँगे। क्या समिति का ये निष्कर्ष संविधान द्वारा भारत के हर नागरिक को दिए गए अपनी इच्छा के धर्म को मानने और पालन करने के मौलिक अधिकार पर सीधा-सीधा हमला नहीं है?

 सर्वोच्च न्यायालय ने २०११ में छानबीन समिति को अजीत जोगी की जाति तय करने के लिए २ महीने का समय दिया था। ६ साल- ७२ महीने- बाद समिति ने रिपोर्ट प्रस्तुत तो की पर जोगी की जाति क्या है, ये आज तक नहीं बताया। अगर जोगी आदिवासी नहीं है, तो जोगी किस जाति के हैं?

अमित जोगी ने कहा कि अगर रमन सिंह सच्चे हैं तो वो मेरे आठ सवाल का जवाब दें । छत्तीसगढ़ की जनता सच जानना चाहती है और वो जानकार रेहगी । उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि जाति मामले में मुख्यमंत्री और दिल्ली और नागपुर में बैठे उनके आकाओं ने गलत तार छू लिया है। न्यायालय का ऐसा झटका लगेगा कि साजिशकर्ता अगली बार किसी के विरुद्ध साजिश करना भूल जायेंगे।

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