अफसरशाही से नाराज कर्मचारियों ने किया राजधानी में जोरदार प्रदर्शन,सर्विस रिकार्ड छानबीन का आदेश वापस लेने की मांग

IMG-20170715-WA0008रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ , रायपुर जिला शाखा के आह्वान पर प्रदेश के कर्मचारियों ने शुक्रवार को लंच टाइम पर कलेक्टोरेट में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश के कर्मचारियों को 50 वर्ष की उम्र और 20 वर्ष सेवा में अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिर्देश से कर्मचारी आक्रएशित हैं।कर्मचारियों ने इस सिलसिले में रायपुर कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा और शआसन का तुगलकी फरमान वापस लेने की माँग की।

                       संघ की ओर से कहा गया है कि मध्यप्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने 50 वर्ष की आयु अथवा 20 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए उनकी सर्विस रिकार्ड की छानबीन कर समीक्षा करने के निर्देश 22 अगस्त 2000 को दिए थे।

                      लेकिन इस े दो स्थिति में ही लागू करने की बात लिखी गई थी। एक तो जिसमें कर्मचारी की ईमानदारी-सत्य- निष्ठा संदेहजनक हो । और दूसरा शारीरिक क्षमता में कमी हो, अर्थात अपंगता- बीमारी की स्थिति में ही रिकार्ड की छानबीन करना था। लेकिन छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने नकल करते समय अकल का उपयोग नहीं किया और बिना किसी आधआर के ऐसा तुगलकी फरमान जारी कर दिया।

                         क्रमचारी संघ का कहना है कि इसी आदेश को छत्तीसगढ़ शासल के सामान्य प्रशासन विभाग ने 3 नवंबरर 2003 को जारी किया था। जिसमें संभागायुक्त कार्यालय बंद होने के कारण संभाग स्तर के प्रकरण विभागाध्यक्ष स्तर की समिति को सौंपने कहा गया था।लेकिन छत्तीसगढ़ शआसन के सामान्य प्रशासन विभाग ने जो आधारहीन आदेश जारी किया है, उससे प्रदेश में अफशरशाही का राज चलेगा। साथ ही डॉ. रमन सिंह सरकार को साजिश के तहत बदनाम किया जाएगा।संघ के प्रदर्शन के दौरान सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष करने और 60 से 62 वर्ष करने के बाद अब 50 में सीधे उतारने को लेकर भारी आक्रोश प्रकट किया गया।

संघ ने वर्ष 2004 के बाद नियक्त सरकारी कर्मचारियों को पेंशन से वंचित करने तथा सामान्य भविष्यनिधि व अँशदायी पेंशन योजना के कारण व्यवधान उत्पन्न होने की स्थिति में पुनः पेंशन योजना लागू करने की भी मांग रखी है। संघ ने अपने ज्ञापन में 4 स्तरीय पदोन्नत वेतनमान देने , चुनावी घोषणा पत्र को लागू करने, 7वें वेतनमान में मंहगाई भत्ता सहित अन्य भत्तों के पुनरीक्षण का आदेश जारी करने प्रशासनिक सुधार आयोग को तत्काल प्रतिवेदन सौंपने , वेतन विसंगति दूर करने और 4 प्रतिशत मंहगाई भत्ता के भुगतान हेतु नया शाफ्टवेयर तैयार करने सहित कई अन्य मांगों का जिक्र भी अपने त्रापन में किया है।

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